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जनसंघ का ‘जलता हुआ दीपक’ कैसे बना BJP का ‘कमल का फूल’

हमारे देश में राजनीतिक दलों के लिए चुनाव चिन्‍ह की व्‍यवस्‍था मतदाताओं की सुवि‍धा के लिए है। इसका मूल उद्देश्‍य यह है कि वैसे मतदाता, जो अक्षर पहचान नहीं पाते वह चुनाव चिन्‍ह देखकर अपनी पसंदीदा पार्टी या उससे जुड़े नेता को वोट देंगे। यही कारण है कि चुनाव चिन्‍ह पार्टियों के लिए बहुत मायने रखता है, क्‍योंकि यही उसकी पहचान बनती है। आजादी के बाद जहां कांग्रेस के चुनाव चिन्‍ह में कम से कम दो बार बदलाव हुआ, वहीं बीजेपी भी इस बदलाव से अछूती नहीं रही।

‘दीपक’ था जनसंघ का चुनाव चिन्‍ह
मौजूदा भारतीय जनता पार्टी यानी बीजेपी की स्‍थापना 1980 में हुई। लेकिन इससे 29 साल पहले ही डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 1951 में भारतीय जनसंघ की नींव रखी थी, जो आगे चलकर बीजेपी बन गई। उस दौर में भारतीय जनसंघ का चुनाव चिन्ह ‘दीपक’ हुआ करता था। जी हां, यानी जो ‘कमल’ आज खिल रहा है, वह तब ‘दीपक’ बनकर जलने को बेताब था।

जनसंघ से जनता पार्टी और ‘हलधर किसान’
साल 1977 में आपातकाल के बाद देश की राजनीति में बड़ा बदलाव आया। कांग्रेस के ख‍िलाफ देशभर में माहौल बन गया था। ऐसे में जनसंघ को ‘जनता पार्टी’ बनाने की कवायद शुरू हुई। कई अन्य पार्टियों को जनसंघ में मिला दिया गया और तब इसका चुनाव चिन्‍ह ‘दीपक’ से बदलक ‘हलधर किसान’ हो गया।

बीजेपी का पहला सत्र और वाजपेयी जी
इसके बाद भारतीय जनता पार्टी की स्थापना 6 अप्रैल 1980 को हुई। पार्टी का पहला सत्र मुंबई में संपन्‍न हुआ था। इसकी अध्यक्षता पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने की थी। इस दौरान एक बार फिर पार्टी का चुनाव चिन्‍ह बदला और यह ‘कमल का फूल’ बना। जानकार बताते हैं कि पार्टी ने कमल के फूल को अपना चिन्‍ह ऐसे ही नहीं चुना, बल्‍क‍ि इसके पीछे भी एक दिलचस्‍प किस्‍सा है।

कमल के फूल की पार्टी के लिए महत्‍ता
बात 1857 की है। सीपॉय विद्रोह के दौरान चपाती और कमल के बीज का इस्तेमाल सूचना और संदेश भेजने के लिए किया जाता था। इसके बाद जब कुछ लोगों ने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह किया, तब उन्‍होंने कमल के फूल को ही खुले तौर पर चिन्ह के रूप में इस्तेमाल किया। इन विद्रोहियों में अध‍िकतर लोग ऊंची जाति के ब्रिटिश भारतीय, खासकर ब्राह्मण थे। ये जानवरों की खाल और उनके उत्पाद से बने हथियारों का इस्तेमाल नहीं करना चाहते थे।

‘कमल’ से यह है पार्टी का मतलब
बीजेपी के संस्थापकों ने ‘कमल’ को चुनाव चिन्ह इसलिए भी चुना कि यह ब्रिटिश शासन के खिलाफ पहले भी इस्तेमाल किया गया था। यही नहीं, यह पार्टी की राजनीतिक विचारधारा को सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के रूप में भी वर्णित करता है।

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