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कभी साइकिल पर ले गए थे रॉकेट, कुछ ऐसा रहा भारत का अंतरिक्ष सफर

भारत दुनिया का चौथा देश बन गया है जिसके पास अंतरिक्ष में मार करने की क्षमता है। मिशन शक्ति के तहत भारत ने अंतरिक्ष में 300 किलोमीटर की दूरी पर सैटलाइट को मार गिराया। सिर्फ 3 मिनट के अंदर ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। आइए आज जानते हैं कि कैसे साइकिल पर रॉकेट ले जाने से लेकर अब तक भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है…

मिशन शक्ति में DRDO की भूमिका
मिशन शक्ति को कामयाबी के साथ अंजाम देने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी ने डीआरडीओ के वैज्ञानिकों को बधाई दी। डीआरडीओ ने इस मिशन शक्ति को अंजाम दिया है। लो-अर्थ ऑर्बिट एरिया (एलईओ) में एक सैटलाइट को डीआरडीओ ने मार गिराया और अपनी ऐंटि सैटलाइट क्षमता का प्रदर्शन किया। यह मिशन पूरी तरह स्वदेशी था और इसे सिर्फ 3 मिनट में अंजाम दिया गया। डीआरडीओ ने यूपीए सरकार के शासनकाल में इस तरह की परियोजनाओं पर काम करने की घोषणा की थी। योजनाओं को अंतिम रूप अब दिया जा रहा है। साल 2012 में अग्नि V की लॉन्चिंग भारत की ऐंटि सैटेलाइट क्षमता विकसित करने की दिशा में पहला कदम था।

​साइकिल से लॉन्च पैड ले गए रॉकेट को
21 नवंबर, 1963 को केरल में तिरुअनंतपुरम के करीब थंबा से पहले रॉकेट के लॉन्च के साथ भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम शुरू हुआ। यह रोचक बात है कि उस रॉकेट को लॉन्च पैड तक एक साइकिल से ले जाया गया था और उसे एक चर्च से लॉन्च किया गया। पूरी कहानी कुछ इस तरह है। नारियल के पेड़ों के बीच स्टेशन का पहला लॉन्च पैड था। एक स्थानीय कैथोलिक चर्च को वैज्ञानिकों के लिए मुख्य दफ्तर में बदला गया। बिशप हाउस को वर्कशॉप बना दिया गया। मवेशियों के रहने की जगह को प्रयोगशाला बनाया गया जहां अब्दुल कलाम आजाद जैसे युवा वैज्ञानिकों ने काम किया। इसके बाद रॉकेट को लॉन्च पैड तक साइकिल पर ले जाया गया। थोड़े समय बाद दूसरा रॉकेट लॉन्च किया गया। वह पहले वाले से थोड़ा भारी था। उसे बैलगाड़ी पर ले जाया गया था।

इसरो की स्थापना
15 अगस्त 1969 को डॉ.विक्रम साराभाई ने इसरो की स्थापना की थी। इसका मकसद अंतरिक्ष शोध के क्षेत्र में काम करना था। एसएलवी-3 भारत का पहला स्वदेशी सैटलाइट लॉन्च वीइकल था। डॉ.ए.पी.जे.अब्दुल कलाम इस परियोजना के निदेशक थे।

कम खर्च में ज्यादा कम-ऑटो किराये के बराबर खर्च में मंगल मिशन

पिछले 40 सालों में इसरो का खर्च नासा के एक साल के बजट के आधे से भी कम रहा।

चंद्रमा पर इसरो के पहले मिशन चंद्रयान प्रथम पर करीब 390 करोड़ रुपये खर्च हुए जो नासा द्वारा इसी तरह के मिशन पर होने वाले खर्च के मुकाबले 8-9 गुना कम है।

इसरो का मंगल मिशन अब तक का सबसे सस्ता मिशन था, जिस पर महजा करीब 450 करोड़ रुपये यानी 12 रुपये प्रति किलोमीटर खर्च आया जो ऑटो किराये के बराबर है।

पीएसएलवी लॉन्च
इसरो ने अब तक एक के बाद एक 23 पीएसएलवी सफलतापूर्वक लॉन्च किए हैं। इसरो ने अपने सैटलाइट्स के अलावा अन्य देशों के सैटलाइट्स भी छोड़े हैं।

1981 में जब ऐपल सैटलाइट को लॉन्च किया गया था तो उसे लॉन्चपैड तक बैलगाड़ी पर लाया गया था।

चाँद पर पहला मिशन
चांद पर भेजे गए इसरो के पहले मिशन का नाम था चंद्रयान। 22 अक्टूबर, 2008 को चंद्रयान मिशन लॉन्च किया गया था। इस दौरान चांद पर पानी की खोज हुई। इसकी साल 2009 में नासा ने भी पुष्टि की थी।

अपना जीपीएस सिस्टम
दुनिया में सिर्फ छह अंतरिक्ष एजेंसियों के पास ही अपनी धरती से सैटलाइट्स बनाने और छोड़ने की क्षमता है। इसरो भी उनमें से एक हैं। अधिकतर देश अपने नेविगेशन से संबंधित मकसद के लिए अमेरिका आधारित जीपीएस सिस्टम के भरोसे रहते हैं, भारत ने सफलतापूर्वक अपना खुद का नेविगेशनल सैटलाइट्स आईआरएनएसएस लॉन्च किया है।

मंगल मिशन

काफी समय पहले जब हमारे वैज्ञानिकों ने मंगल मिशन के लिए अमेरिका से इंजिनियरिंग सहायता और विधियों के बारे में मदद मांगी तो अमेरिका ने इनकार कर दिया। इससे भारतीय वैज्ञानिक हतोत्साहित नहीं हुए। उनलोगों ने काफी मेहनत की और अपना सबकुछ तैयार किया और बहुत ही कम खर्च में इस ऐतिहासिक उपलब्धि को हासिल किया। 5 नवंबर, 2013 को भारत ने मंगल मिशन की शुरुआत की थी।

104 सैटलाइट्स लॉन्च करके दुनिया को चौंकाया
15 फरवरी, 2017 को इसरो ने दुनिया को चौंका दिया था। श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर के पहले लॉन्च पैड से भारत ने अंतरिक्ष में 104 सैटलाइट्स छोड़े थे।

गगनयान
भारत ने 2002 तक अपने मानवयुक्त मिशन को अंतरिक्ष में भेजने की योजना बनाई है। इस मिशन को गगनयान मिशन का नाम दिया गया है। इस मिशन के लिए सरकार ने जरूरी फंड भी आवंटित कर दिया है। वी.आर.ललिताम्बिका के हाथों में गगनयान की कमान होगी।

भुवन सॉफ्टवेअर
इसरो ने भुवन नाम का सॉफ्टवेयर विकसित किया है। यह गूगल अर्थ का भारतीय अवतार है। इसकी मदद से भारत के किसी भी हिस्से को 3-डी तस्वीर के रूप में इंटरनेट पर देखा जा सकता है।

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