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अरबपति हैं सादगी पसंद Kamal Nath, इंदिरा कहती थीं ‘तीसरा बेटा’

14 साल बाद सत्ता का स्‍वाद
साल 2018 का अंत कांग्रेस पार्टी के लिए खुशियों का मौसम लाया है। पांच राज्‍यों में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी ने तीन राज्‍यों में जीत दर्ज की। खासकर मध्‍य प्रदेश की सफलता कांग्रेस के लिए कई मायनों में महत्‍वूर्ण है, क्‍योंकि यहां पार्टी पिछले 14 साल से सत्ता से दूर थी। मध्‍य प्रदेश में मुख्‍यमंत्री पद किसको मिलेगा, इसको लेकर तमाम माथापच्‍ची के बाद कमलनाथ का नाम फाइनल हुआ। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्‍व ने युवा ज्‍योतिरादित्‍य सिंध‍िया के ऊपर अनुभवी कमलनाथ को सिंहासन के लिए चुना।

7 महीने पहले संभाला मध्‍य प्रदेश का प्रभार
कमलनाथ ने महज सात महीने पहले मध्य प्रदेश कांग्रेस का प्रभार संभाला था। 14 साल से प्रदेश में बीजेपी राज कर रही थी। श‍िवराज सिंह चौहान लोकप्रिय मुख्‍यमंत्री और इधर, कांग्रेस के भीतर नेतागण आपस में ही उलझे हुए थे। ऐसे में कमलनाथ के लिए चुनौती दोहरी थी। लेकिन उन्‍होंने बाजी पलट दी। फिर चाहते दिग्विजय सिंह हों या ज्योतिरादित्य सिंधिया, कमलनाथ ने सभी के साथ तालमेल बना लिया।

स्‍कूल में हुई थी संजय गांधी से दोस्‍ती
26 अप्रैल 2018 को मध्य प्रदेश का प्रभार संभालने वाले कमलनाथ कांग्रेस में गहरी पैठ रखते हैं। वह संजय गांधी के स्‍कूल के दिनों से दोस्‍त थे। वह खुद अरबों रुपये के सम्राज्‍य के मालिक हैं। लेकिन 50 साल के राजनीतिक जीवन में उन्‍होंने हमेशा खुद को लो-प्रोफाइल ही रखा है।

कानपुर में पैदा हुए, 2 अरब 73 करोड़ की संपत्त‍ि
यूपी के कानपुर में 18 नवंबर 1946 को जन्‍मे कमलनाथ ने दून स्कूल के बाद कोलकाता यूनिवर्सिटी के सेंट जेवियर्स कॉलेज से बीकॉम की पढ़ाई की है। लिहाजा, अर्थशास्‍त्र और बिजनेस की दुनिया में वह गहरी समझ रखते हैं। राजनीति करियर को अलग छोड़ दें तो कमलनाथ एक तगड़े बिजनेसमैन भी हैं। सितंबर 2011 में कमलनाथ को सबसे धनी केंद्रीय मंत्री घोषित किया गया था। तब उनके पास 2.73 बिलियन यानी 2 अरब 73 करोड़ रुपये की संपत्ति थी।

23 कंपनियों के बोर्ड मेंबर हैं कमलनाथ
कमलनाथ बिजनेस घराने से ताल्‍लुक रखते हैं। वह खुद भी एक बिजनेस टायकून हैं। उनका बिनजेस रियल एस्टेट, एविएशन, हॉस्पिटलिटी और एजुकेशन के क्षेत्र में फैला हुआ। वह देश के शीर्ष प्रबंधन संस्थान आईएमटी गाजियाबाद के डायरेक्टर हैं और करीब 23 कंपनियों के बोर्ड मेंबर हैं। ये कारोबार उनके दो बेटे नकुलनाथ और बकुलनाथ संभालते हैं।

लगातार 9 बार छिंडवाड़ा से सांसद बनने का रिकॉर्ड
दूसरी ओर, राजनीतिक करियर की बात करें तो कमलनाथ का नाम सबसे वरिष्‍ठ सांसदों में शुमार हैं। मध्य प्रदेश की छिंदवाड़ा लोकसभा सीट से उन्‍होंने लगातार नौ बार जीत दर्ज करने का रिकॉर्ड बनाया है। वह पहली बार 7वीं लोकसभा यानी 1980 में सांसद बने थे। यहीं से सक्रिय राजनीति में उनकी एंट्री हुई। उसके बाद 1985, 1989 और 1991 में भी उन्‍होंने जीत हासिल की। साल 1991 में कमलनाथ को पहली बार वह केंद्रीय मंत्री बनाया गया। उन्हें पर्यावरण और वन मंत्रालय में केंद्रीय राज्य मंत्री का स्वतंत्र प्रभार मिला।

संजय गांधी के कारण जज से की थी बदतमीजी
संजय गांधी से दोस्‍ती के कारण गांधी परिवार से कमलनाथ का गहरा नाता रहा है। यूथ कांग्रेस के दिनों में संजय गांधी ने कमलनाथ को पश्चिम बंगाल में सिद्धार्थ शंकर रे और प्रिय रंजन दासमुंशी को टक्कर देने के लिए उतारा था। इमरजेंसी के बाद संजय गांधी को गिरफ्तार किया गया। कमलनाथ तब संजय गांधी के लिए जज के साथ बदतमीजी कर बैठे थे। इस वहज से वह तिहाड़ जेल पहुंच गए थे। इंदिरा गांधी की नजरों में कमलनाथ का कद तब बढ़ गया था।

इंदिरा ने मंच से कहा था- मेरा तीसरा बेटा
साल 1980 में जब पहली बार कांग्रेस ने उन्हें मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा से टिकट दिया था, तब चुनाव प्रचार में इंदिरा गांधी ने अपने भाषण में कहा था, ‘मैं नहीं चाहती कि आप लोग कांग्रेस नेता कमलनाथ को वोट दीजिए। मैं चाहती हूं कि आप मेरे तीसरे बेटे कमलनाथ को वोट दें।’ तब लोगों ने नारा भी दिया था- इंदिरा के दो हाथ, संजय और कमलनाथ।

बदल दी छिंदवाड़ा की सूरत
छिंडवाड़ा से नौ बार सांसद रहने वाले कमलनाथ ने इलाके की सूरत बदलने का भी काम किया। उन्होंने वहां स्कूल-कॉलेज और आईटी पार्क बनवाए। रोजगार को बढ़ावा देने के लिए वेस्टर्न कोलफील्ड्स और हिंदुस्तान यूनीलिवर जैसी कंपनियां खुलवाईं। क्लॉथ मेकिंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, ड्राइवर ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट भी इलाके में खुलवाए गए।

सिख विरोधी दंगों में आया नाम
संजय गांधी की मौत और फिर इंदिरा गांधी की हत्या के बाद कमलनाथ के राजनीतिक करियर में थोड़ा ठहराव भी आया। 1984 में इंदिरा की हत्या के बाद सिख विरोधी दंगों में उनका नाम भी आया था। हालांकि सज्जन कुमार या जगदीश टाइटलर जैसे नेताओं की तरह दंगों में कमलनाथ की भूमिका स्पष्ट नहीं हो सकी। कमलनाथ पर आरोप है कि वह 01 नवंबर 1984 को नई दिल्ली के गुरुद्वारा रकाबगंज में तब मौजूद थे जब भीड़ ने दो सिखों को जिंदा जला दिया था।

‘हां, मैं गुरुद्वारे में था, लेकिन…’
कमलनाथ ने मीडिया के सामने भी कई बार इन आरोपों पर अपनी बात रखी है। उनका कहना है, ‘मैं वहां मौजूद था, क्योंकि मेरी पार्टी ने मुझे वहां पहुंचने को कहा था। गुरुद्वारे के बाहर भीड़ मौजूद थी। मैं उन्हें हमला करने से रोक रहा था। पुलिस ने भी मुझसे भीड़ को नियंत्रित करने की ही गुजारिश की थी। दंगों की एसआईटी जांच, रंगनाथ मिश्रा कमीशन इन्कवायरी और जीटी नानावती कमीशन इन्कवायरी ने मेरे खिलाफ कुछ नहीं पाया गया। जरूरत पड़ी तो मैं आगे भी जांच का सामना करने को तैयार हूं।’

हवाला कांड में आया नाम, कट गया टिकट
कमलनाथ का नाम हवाला कांड से भी जुड़ा। 1996 में जब कमलनाथ पर हवाला कांड के आरोप लगे, तब पार्टी ने छिंदवाड़ा से उनकी पत्नी अलका नाथ को टिकट दिया। वो जीत गईं, लेकिन अगले ही साल हुए उपचुनाव में कमलनाथ हार गए। यह छिंदवाड़ा से उनकी केवल एक हार है। हवाला कांड और सिख विरोधी दंगों की बात छोड़ दें, तो कमलनाथ पर और किसी तरह के कभी कोई आरोप नहीं लगे।

कई अहम मंत्रालयों का संभाला मोर्चा
अरबपति होने के बावजूद कमलनाथ हमेशा लो-प्रोफाइल ही रहते हैं। वह पर्यावरण, अर्बन डेवलपमेंट, कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज जैसे महत्‍वपूर्ण मंत्रालयों में मंत्री रह चुके हैं। शांत और शालीन माने जाने वाले कमलनाथ कार्यकर्ताओं में भी बहुत पॉपुलर हैं। कांग्रेस कार्यकर्ताओं में एक बात खूब प्रचलित है कि कमलनाथ का दरवाजा कांग्रेस पार्टी और उसके कार्यकर्ताओं के लिए आधी रात को भी खुला रहता है।

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