You are here
Home > वायरल > गोवा के नाम पर आहें भरते हैं, लेकिन ये नहीं जानते होंगे आप!

गोवा के नाम पर आहें भरते हैं, लेकिन ये नहीं जानते होंगे आप!

गोवा। यह नाम सुनते ही हम भारतीयों की जैसे बांछे ख‍िल जाती हैं। मन उमंग से भर जाता है। दोस्‍तों के बीच ट्रिप की प्‍लानिंग शुरू हो जाती है। गोवा पहुंचते ही भागदौड़ भरी जिंदगी से जैसे आजादी का एहसास होता है। समंदर की लहरों और हवाओं के बीच कुछ भी करने की आजादी। जैसे मन, वैसे रहने की आजादी। हालांकि, कई बार इतनी आजादी सही भी नहीं होती, लेकिन इस बारे में बात फिर कभी। आज चर्चा गोवा की। उस गोवा कि जो अपने मसालों की सुगंध और खूबसूरत नजारों से सबका मन मोह लेता है।

1961 से पहले हिंदुस्‍तान में नहीं था गोवा

जो लोग भी गोवा गए हैं, उन सभी की वहां से जुड़ी कई कहानियां होंगी। किस्‍से होंगे। ऐसी यादें होंगी, जो जिंदगीभर साथ चलेंगी। लेकिन क्‍या कभी यह सोचा है कि इस खूबसूरत और बिंदास गोवा की खुद की क्‍या कहानी है। नहीं ना? चलिए हम बताते हैं। सबसे पहली बात तो यह कि गोवा 1961 से पहले हिंदुस्‍तान का हिस्‍सा था ही नहीं।

अंग्रेज चले गए, लेकिन गोवा…

हमारा देश को 15 अगस्‍त 1947 को अंग्रेजी हुकूमत से आजादी मिली। हिंदुस्‍तान विविधताओं का देश है। आजादी से पहले यहां कई राजा-महाराजा और रियासतें थीं। अखंड भारत या यह कहें कि ‘एक भारत’ के ख्‍वाब को पूरा करने में देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू और सरदार वल्‍लभ भाई पटेल को खूब मेहनत करनी पड़ी। बिखरे र‍ियासतों को एकसूत्र में जोड़ा गया। वो सरदार पटेल ही थे जिनकी भू-राजनीतिक सूझ-बूझ के कारण छोटी-बड़ी 562 रियासतों को भारतीय संघ में समाहित कर दिया था।

गोवा में था पुर्तगालियों का शासन

‘लौह पुरूष’ सरदार पटेल ने इसके लिए देशभर का भ्रमण किया। राजाओं से बात की। तब कुछ ऐसे भी प्रांत थे जहां उपनिवेशी जड़े इस कदर गहरी थी की आजादी के बहुत वर्षों तक वो प्रांत भारत का हिस्सा नहीं थे। उनमें से ही एक प्रांत था गोवा, जहां पुर्तगालियों का करीब 450 वर्षों से शासन था।

आंदोलन हुआ तो गोलियां चला दीं
साल 1947 में जब देश आजाद हुआ, तभी भी गोवा में पुर्तगालियों का ही राज था। भारत सरकार ने कई बार अनुरोध किया, लेकिन पुर्तगाली गोवा छोड़ने को तैयार नहीं थे। पुर्तगाली साम्राज्य के खिलाफ 1955 में सत्याग्रह आंदोलन भी हुआ, लेकिन पुर्तगालियों ने क्रूरता दिखाते हुए 22 लोगों को बंदूक की गोलियों से मार डाला।

‘ऑपरेशन विजय’ और 36 घंटे बाद समर्पण
साल 1961 की बात है। पंडित जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्‍व में 19 दिसंबर को ‘विजय’ नामक आर्मी ऑपरेशन के आगे पुर्तगाली झुक गए। गोवा का भारतीय संघ में विलय हो गया। पुर्तगाल के गवर्नर जनरल वसालो ई. सिल्वा ने भारतीय सेना प्रमुख पीएन थापर के सामने सरेंडर कर दिया था। कुछ इतिहासकार यह भी बताते हैं कि ‘विजय’ नाम का यह सैन्य ऑपरेशन 36 घंटे से भी ज्यादा समय तक चला और फिर 19 दिसंबर 1961 को भारत ने गोवा को आजाद करवा लिया था।

1987 में मिला राज्‍य का दर्जा

इसके बाद 30 मई 1987 को गोवा को भारतीय राज्‍य का दर्जा मिला, लेकिन ‘गोवा मुक्ति दिवस’ हर साल 19 दिसंबर के दिन मनाया जाता है। गोवा क्षेत्रफल के हिसाब से आकार में छोटा जरूर है, लेकिन वह एक बड़ा ट्रेड सेंटर भी रहा है। समंदर किनारे होने के कारण गोवा ने अंग्रेजों को आकर्षित किया था। इतना ही नहीं मुगल शासन के समय भी राजा इस तरफ आकर्षित होते रहे हैं। तब बात व्‍यापार की थी। अब पर्यटन के लिए गोवा दुनियाभर के सैलानियों का फेवरेट डेस्‍ट‍िनेशनल बन गया है।

Leave a Reply

Top