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26/11: ऐसे खींची थी इस जांबाज पत्रकार ने कसाब की तस्वीरें

मुंबई में गोलीबारी का शोर था। सब डर के साये में थे। लोग घरों में कैद हो रहे थे। पुलिस की गाड़ियों, एम्बुलेंस और फायरब्रिगेड के सायरन की आवाज सड़कों पर गूंज रही थी। कई पत्रकार घटना को कवर कर रहे थे। ऐसे ही एक फोटो जर्नलिस्ट हैं सेबेस्टियन डिसूजा। वह रेलवे स्टेशन के पास मौजूद अपने दफ्तर में थे। जब उन्हें इस हमले कि जानकारी मिली, तो वह बिना सुरक्षा अपना कैमरा और लेंस लेकर निकल पड़े फोटो खींचने। 26/11 का हमला देश के लिए दर्दनाक हमलों में से एक है, जिसमें 166 लोगों की जान गई और 300 से ज्‍यादा लोग जख्मी हुए।

निडर होकर निकल पड़े थे ‘सेबी’

मीडिया क्षेत्र में फोटो जर्नलिस्ट सेबेस्टियन को ‘सेबी’ के नाम से पहचाना जाता है। उनकी तस्वीरों और गवाही ने 26/11 के मुकदमे में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने और उनके कैमरे ने काफी कुछ घटता देखा था, जो सबके सामने आ सका। इन सबूतों ने कसाब को 2012 में फांसी पर लटकाने अहम भूमिका निभाई। सेबी साल 2012 में रिटायर हुए और इन दिनों गोवा में हैं। सेबी कहते हैं कि वो इस हमले को भुला देना चाहते हैं।

कैसे खींची थी कसाब की फोटो?

सेबी कहते हैं, ‘मैं प्लेटफॉर्म पर खड़ी ट्रेन के एक डिब्बे में दौड़कर गया और फोटो लेने की कोशिश की। लेकिन मुझे अच्छा एंगल नहीं मिला.. तो दूसरे डिब्बे में गया और आतंकवादियों के आने का इंतजार किया। फोटो लेने के लिए मेरे पास थोड़ा ही वक्त था। मेरे ख्याल से उन्होंने मुझे फोटो लेते हुए देख भी लिया था, लेकिन ऐसा लगा है कि उन्होंने ध्यान नहीं दिया। बता दें, एके-47 राइफल थामे कसाब की नजदीक से फोटो खींचने के लिए सेबी (67) को ‘वर्ल्ड प्रेस फोटो’ पुरस्कार से नवाजा गया था।

स्टेशन पर ही मारा जा सकता था कसाब को
तस्वीर को सेबी ने छत्रपति शिवाजी टर्मिनल्स पर खींचा था। इस हमले को याद करते हुए वो कहते हैं, ‘उस दिन अगर रेलवे स्टेशन पर मौजूद पुलिस अधिकारी कसाब को वहीं शूट कर देते, तो शायद इतने लोगों की जान नहीं जाती।’ उनके मुताबिक, ‘वहां पर पुलिस की दो बटालियन मौजूद थीं।’

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