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फिल्म वीर ज़ारा की तरह अपनी गर्लफ्रेंड से मिलने पाकिस्तान गए हामिद ने बताया वहां की जेल में रहने के दौरान का काला सच; पाकिस्तान में मुझे तहखाने में रखा गया, सोना तो दूर…

दुनिया में बहुत सारे देश है. जहा की शासन की प्रक्रिया को काफी उच्च स्तर तक माना जाता है. लेकिन हमारे देश में दूसरे देशो के नागरिको को एक सम्मान की नज़र से देखा जाता है और उन्हें अतिथि समझकर उनकी भावना का आदर किया जाता है.अगर किसी दूसरे देश का नागरिक मुजरिम भी है तो उन्हें सही तरिके से कानूनी प्रक्रिया द्वारा सज़ा दी जाती है.

दूसरी तरफ भारत का पडोसी देश पाकिस्तान है जो अपनी हरकतों से पुरे विश्व में प्रसिद है. वर्तमान में पकिस्तान में जेल की सजा काट कर आये हामिद ने जेल में दी जाने वाली प्रतारणा के बारे में बताया है.

हामिद मुंबई के रहने वाले है. इनकी पूरी कहानी बॉलीवुड की फिल्म वीर ज़ारा की तरह ही है.हामिद नेहाल पाकिस्तान की एक लड़की से ऑनलाइन मिला और उसका दीवाना हो गया था . ये दीवानगी इस कदर बढ़ी कि वो अपनी प्रेमिका से मिलने अफगानिस्तान के रास्ते पाकिस्तान पहुंच गया. लेकिन वह बहुत ही ज्यादा मुश्किल में पड़ गया था.


पकिस्तान से जब हामिद वापस लौटे तो उन्होंने कहा की सजा देने वाले से बड़ा होता है माफ़ करने वाला अब यही दुआ है कि वह जहां भी रहे, खुश रहे। मेरे साथ धोखा हुआ है। पाकिस्तान के खिलाफ कुछ करना मेरा मकसद कतई नहीं था.

मैं वहां लड़की की मदद करने गया था। उस लड़की ने मुझसे कहा था कि मेरी मदद करो, मेरे घर वाले जबरदस्ती मेरी शादी करवा रहे हैं। मैं भी पीछे नहीं हटा. वहां पहुंचने पर मुझे पता चला कि मेरे साथ धोखा हुआ है. जिन लोगों ने मुझे रास्ता बताया, उन्होंने ही जाल बिछा रखा था। जब पाकिस्तान में एक लॉज से मुझे गिरफ्तार किया गया, तब मुझे अहसास हुआ कि अब हिंदुस्तान लौट पाना मेरे लिए मुश्किल होगा.

हामिद ने बताया- मुझे ऐसी जगह रखा था, जहां से पता ही नहीं चलता था कि दिन है या रात

हामिद ने कहा की मुझे ऐसी जगह पर कैद करके रखा था जहा से न तो दिन का पता चलता और न ही रात का पता चलता था. उन्होंने कहा की मुझे जमीं से 15 फिट निचे एक कोटरी में कैद करके रखा था. उन्होंने कहा की न तो उन्हें खाने के लिए दिया जाता और न ही कुछ और सुविधा. वह बैठे बीएस केवल रिहा होने की दुआ करो.

पाकिस्तान के अफसर कभी भी आते। पूछताछ के लिए ले जाते। फिर लौट जाते. मुझे आज भी अच्छी तरह से याद है वो सर्दी की भयानक रात थी पूरा हफ्ता मुझसे पूछताछ की गई. पूरा हफ्ता पैरों पर खड़ा रहने को कहा गया, वह भी बिना खाये पिए और सोए. आंखों पर काली पट्टी बंधी थी. हिलता तो मारने लग जाते थे.

वहां हर दिन हर रात होता था दर्द भरा

हामिद ने कहा की सामने अफसर था पर मुझे घेरने और पहाड ही दिखाई दे रहे थे. कई दिन बिट गए उसके बाद कई महीने बिट गए लेकिन कोई खबर रिहा की नहीं थी. अफसर आते पूछताझ करते मारते और चले जाते थे. वह के कैदी भी एक दूसरे से बात नहीं करते थे. हर एक दिन निकलना बहुत ही ज्यादा मुश्किल हो रहा था. बस एक ही दिन वो था. और वो था ईद का दिन उस समय मुझे सुकून मिला था. उस दिन न तो मारपीट होती और न ही टॉर्चर करते.

हामिद ने बताया- 6 साल में हर एक दिन, एक-एक पल गुजारना मुश्किल था, पर भरोसा था कि मैं एक दिन वतन लौटूंगा


पकिस्तान के सारे अफसर जानते थे की में बेगुनाह हु. अफसर ने कहा तुमने कोई गुन्हा नहीं किया है. लेकिन तुम एक हिंदुस्तानी हो. उन्होंने कहा की यही तुम्हारे लिए इन्साफ है तो मेरी मदद के लिए भी तुम्हारे पास रास्ता होगा. छह साल में हर एक दिन, एक-एक पल गुजारना मुश्किल था। पर भरोसा था कि मैं एक दिन मै अपने वतन हिंदुस्तान वापस लौटूंगा.

हामिद ने कहा की मैने पाकिस्तान में पूरा वैध तरीके से जाने की कोशिश की थी। पाकिस्तान हाई-कमीशन से पूरे दस महीने तक आधिकारिक तौर पर वीजा के लिए आवेदन किया था। वीजा मिल नहीं रहा था। इस दौरान मुझे उकसाया गया था । और कहा गया कि ‘भाई वीजा के चक्कर में मत पड़ो’। अफगानिस्तान के रास्ते आ जाओ. मैं जज्बाती हो गया. दिमाग के बजाय दिल से सोचा। जो नहीं करना था, वह कर बैठा.

हामिद ने कहा- मैं उस मंजर को शब्दों में बयां नहीं कर सकता

हामिद ने कहा की इन 6 सालो में मेरे पास कुछ नहीं था दुआ के अलावा. उन्होंने कहा की 24 घंटे यही चल रहा था की ऊपर वाले कोई रास्ता बना दे. तू तो जनता है की में कोई गुनहगार नहीं हु. मैने कोई भी गुन्हा नहीं किया है. जब मैं अटारी-वाघा बॉर्डर के उस पार पाकिस्तान में था, तब हर बीतते पल के साथ मेरी धड़कनें तेज हो रही थीं. फिर दरवाजा खुला। सीमा के इस पार मुझे मेरी मां, पापा और मेरा भाई दिखे. छह साल बाद उन्हें मैंने देखा. मैं इस मंजर को अपने शब्दों में बयां नहीं कर सकता। जब सीमा पार कर इतने सालो बाद अपने वतन हिंदुस्तान आया तो इतना सुकून मिला जैसे अपनी माँ की गोद से फिर से निकला हु.

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