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RBI है दुनिया का सबसे अमीर बैंक, अमेरिका के केंद्रीय बैंक के पास भी नहीं है इतना बड़ा खजाना

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) और केंद्र सरकार के बीच बीते साल रिजर्व फंड को लेकर मतभेद हुआ था. दरअसल RBI के पास 9.6 लाख करोड़ रुपये का रिजर्व है. सरकार इसमें से कुछ राशि का इस्‍तेमाल करना चाहती है. लेकिन पूंजी को लेकर रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल और सरकार के बीच गहरे मतभेद पैदा हो गए थे. वित्त मंत्रालय की दलील है कि यह राशि रिजर्व बैंक की कुल परिसंपत्ति (Asset) के 28% के बराबर है जबकि वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंकों के पास ऐसी अतिरिक्त पूंजी के लिए 14% का स्तर पर्याप्‍त है.

समिति के पूर्व गवर्नर बिमल जालान अध्‍यक्ष


हालांकि बाद में विवाद को सुलझाने के लिए 1 समिति बनाने का फैसला हुआ. 19 नवंबर 2018 को हुई बैठक में RBI की रिजर्व फंड के नियमों की जांच परख-कर उस पर सुझाव देने के लिए गठित समिति में बिमल जालान को अध्यक्ष बनाया गया था. अन्‍य सदस्‍यों में राकेश मोहन उपाध्यक्ष, आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग और रिजर्व बैंक केन्द्रीय निदेशक मंडल के दो सदस्यों भारत दोषी और सुधीर मांकड़ शामिल हैं. रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर एनएस विश्वनाथन समिति के छठे सदस्य बनाए गए.

अप्रैल में रिपोर्ट आने की संभावना

रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर बिमल जालान की अध्यक्षता में समिति की पहली बैठक 8 जनवरी को हुई. समिति रिजर्व बैंक के रिजर्व फंड और सरकार के लाभांश के बारे में अपनी सिफारिश देगी. सूत्रों ने बताया कि छह सदस्यों वाली यह समिति संभवत: अप्रैल में अपनी रिपोर्ट सौंप देगी. यह समिति दुनियाभर में केन्द्रीय बैंकों के रिजर्व फंड का आकलन करेगी और केन्द्रीय बैंक के बहीखातों के समक्ष आने वाले जोखिम के प्रावधानों पर अपने सुझाव देगी.

राकेश मोहन उपाध्‍यक्ष हैं


पूर्व आर्थिक मामले विभाग के सचिव राकेश मोहन को समिति का उपाध्यक्ष बनाया गया है. समिति हर संभव परिस्थितियों में रिजर्व बैंक के मुनाफे के उचित वितरण की नीति का भी प्रस्ताव करेगी. इसमें जरूरत से ज्यादा प्रावधान रखे जाने की स्थिति पर भी गौर किया जाएगा.

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